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आपको जानकर हैरानी होगी कि पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंट होने के लिठसà¥â€à¤ªà¤°à¥à¤® का योनि के अंदर जाना जरूरी नहीं होता है। योनि के आसपास के हिसà¥â€à¤¸à¥‹à¤‚ पर सà¥â€à¤ªà¤°à¥à¤® हो तो इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में à¤à¥€ सà¥â€à¤ªà¤°à¥à¤® ओवरी में मौजूद à¤à¤— तक पहà¥à¤‚चकर उसे फरà¥à¤Ÿà¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤œ कर सकता है और आप पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंट हो सकती हैं।यदि वीरà¥à¤¯ (Semen) योनि के अंदर होने की बजाय योनि या वलà¥â€à¤µà¤¾ के आसपास हो तो à¤à¥€ पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥â€à¤¨à¥‡à¤‚सी हो सकती है। महिलाओं की ओवरी में बनने वाला à¤à¤— और पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ का वीरà¥à¤¯ मिलकर à¤à¥à¤°à¥‚ण बनाते हैं।सà¥â€à¤–लन के दौरान पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ के लिंग से जो सफेद रंग का गाढ़ा फà¥à¤²à¥‚इड निकलता है उसे वीरà¥à¤¯ कहते हैं। इस फà¥à¤²à¥‚इड में हजारों सà¥â€à¤ªà¤°à¥à¤® कोशिकाà¤à¤‚ होती हैं और यदि इनमें से à¤à¤• à¤à¥€ महिलाओं की ओवरी में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ अंडे तक पहà¥à¤‚च जाठतो पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥â€à¤¨à¥‡à¤‚सी की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ होती है।
इसका मतलब है कि गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ (Sperm) की कोशिकाओं से होता है न कि वीरà¥à¤¯ से। वीरà¥à¤¯ केवल शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥à¤“ं को à¤à¥‹à¤œà¤¨ देने और जीवित रहने में मदद करता है, लेकिन शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ अंडे तक पहà¥à¤‚चने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ रखता है।वहीं, संà¤à¥‹à¤— के दौरान वजाइना से à¤à¥€ फà¥à¤²à¥‚इड निकलता है जो शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ को वजाइना के अंदर जाने में मदद करता है। इससे शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ को योनि के अंदर जाने का रासà¥â€à¤¤à¤¾ मिलता है और वह अंडे तक पहà¥à¤‚चने तक जीâ€à¤µà¤¿à¤¤ रहता है।वहीं, अगर शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¥à¤£ सीधा योनि के अंदर चले जाà¤à¤‚ तो à¤à¥€ पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥â€à¤¨à¥‡à¤‚सी हो सकती है। इससे सà¥â€à¤ªà¤°à¥à¤® ओवरी में मौजूद अंडे तक आसानी से पहà¥à¤‚च पाता है। लेकिन अगर वीरà¥à¤¯ योनि के आसपास हो तो इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में à¤à¥€ गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ हो सकता है।
यहां पर आपके लिठइस बात को समà¤à¤¨à¤¾ जरूरी है कि पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंट होने के लिठपेनिस का योâ€à¤¨à¤¿ के अंदर जाना जरूरी नहीं है। योनि के आसपास वीरà¥à¤¯ होने से à¤à¥€ गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ हो सकता शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ के बारे में जानें ये दिलचसà¥â€à¤ª बातें
शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥à¤“ं को पता ही नहीं होता कि उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ किस दिशा में जाना है। à¤à¤— के जरिठशà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ को केमिकल संकेत दिठजाते हैं। 5 में से केवल à¤à¤• ही शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ सà¥â€à¤–लन के बाद सही दिशा में आता है।
महिलाओं के पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ तंतà¥à¤° में शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ के जीवित रहने की अवधि अलग-अलग होती है। महिलाओं के शरीर में सà¥â€à¤ªà¤°à¥à¤® पांच दिनों तक जीवित रहता है जबकि किसी सूखी जगह पर वीरà¥à¤¯ के सूखते ही शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ नषà¥â€à¤Ÿ हो जाते हैं।पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ के लिंग से निकलने वाले लगà¤à¤— 90 फीसदी सà¥â€à¤ªà¤°à¥à¤® सà¥â€à¤µà¤¸à¥â€à¤¥ नहीं होते हैं। केवल सà¥â€à¤µà¤¸à¥â€à¤¥ सà¥â€à¤ªà¤°à¥à¤® ही à¤à¤— तक पहà¥à¤‚च पाते हैं।
अब तो आप जान गठना कि पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंट होने के लिठपूरा संà¤à¥‹à¤— करना जरूरी नहीं होता है। सà¥â€à¤ªà¤°à¥à¤® महिलाओं की योनि के आसपास रह कर à¤à¥€ à¤à¤— तक पहà¥à¤‚च सकता है। यदि आप पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥â€à¤¨à¥‡à¤‚सी से बचने के लिठसà¥â€à¤–लन होने से पहले योनि से पेनिस को बाहर निकाल लेते हैं तो आपका à¤à¤¸à¤¾ करना कà¥à¤› हद तक कारगर नहीं होगा। शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ योनि या वलà¥â€à¤µà¤¾ के आसपास रहकर à¤à¥€ गरà¥à¤ धारण करवा सकते हैं।
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